Sunday, July 7, 2024

उस मुलाकात की गहराई

तुमसे मिलने का वो पल,
अभी भी याद है,
एहसास ऐसे थे उस पल में,
उन एहसासों का एहसास अभी भी याद है।

भरी भीड़ में मुझे ढूंढ़ना,
फिर यूँ देखकर मुस्कुराना,
तुम्हारी आँखों में जो सच्चाई है,
उसका एहसास ही अलग है।

तुम्हारी मौजूदगी में,
एक अजीब सी शांति है,
हर दिन जो साथ बीतता है,
वो दिल, दिमाग में रुक सा जाता है।

फिर एक दिन दिल को समझाया है,
उम्मीदों का थामा है,
जो चीज़ मुमकिन नहीं,
उस वक्त को क्यों आगे बढ़ाना है।

दूरी रखना मुश्किल है,
पर ये भी सही है, शायद ज़रूरी है,
तुम्हारे साथ उन लम्हों के एहसास,
वो भी ज़रूरी है।

आगे बढ़ते हैं,
सफ़र कहाँ तक जाएगा देखते हैं,
साथ रहोगे तो बेहतर है,
न रहो तो उस मुलाकात की गहराई काफी है।



Sunday, January 14, 2024

"कहां जाऊं, कहीं जाना जरूरी है क्या"

कहां जाऊं, कहीं जाना जरूरी है क्या,
दिल चाहता है तुम्हे रोक लूं, कहीं जाना जरूरी है क्या !

मानता हूं शुरुआत से मेने कुछ जादा ही मांगा,
क्या करुँ दिल है संभालता है क्या,
मानता हूं शुरुआत से तुमने कहा उम्मीद मत रखना
क्या करुँ इंसान हूं उम्मीद रखना गलत है क्या !

मानता हूं कुछ अतीत की यादे तुम्हे परेशां करती है,
क्या करू उन यादों में अपनी जगह बनाने की कोश्शि करता तो हूं ना,
मानता हूं अतीत के किसी रस्ते में तुम अभी भी हो,
क्या करुँ आगे रास्ते में खड़ा मैं भी हूं ना !

Saturday, January 6, 2024

"फिर एक दिन आएगा"

फिर एक दिन आएगा, तुम्हारा मन भर जायेगा,
भरी आँखे लेके मैं कई सवाल करना चाहूँगा,
सवालों मै उलझा दिमाग दिल से हार जायेगा,
फिर एक दिन 
आएगा, तुम्हारा मन भर जायेगा !

मेरे इन सवालों को नज़रअंदाज़ करते हुए तुम फिर कहोगे,
मैं शुरुआत से साथ था ही नहीं,
मैंने शुरुआत से दिल लगाया ही नहीं,
मैंने शुरुआत से कहा था मुझसे उम्मीद रखना ही नहीं !

लेकिन मैं क्या करुं, इंसान हूँ दिल समय के साथ लग जाता है,
लेकिन मैं क्या 
करुं, इंसान हूँ उम्मीद रखना मेरी फितरत मैं है !

चलो कोई गम नहीं मैं दिल-दिमाग को समझा दूंगा,
अनजान मैं ही था जो वक़्त के साथ बह गया,
नादान मैं ही था जो वक़्त के साथ उम्मीद रखता गया !

उस मुलाकात की गहराई

तुमसे मिलने का वो पल, अभी भी याद है, एहसास ऐसे थे उस पल में, उन एहसासों का एहसास अभी भी याद है। भरी भीड़ में मुझे ढूंढ़ना, फिर यूँ देखकर मु...