कहां जाऊं, कहीं जाना जरूरी है क्या,
दिल चाहता है तुम्हे रोक लूं, कहीं जाना जरूरी है क्या !
मानता हूं शुरुआत से मेने कुछ जादा ही मांगा,
क्या करुँ दिल है संभालता है क्या,
मानता हूं शुरुआत से तुमने कहा उम्मीद मत रखना
क्या करुँ इंसान हूं उम्मीद रखना गलत है क्या !
मानता हूं कुछ अतीत की यादे तुम्हे परेशां करती है,
क्या करू उन यादों में अपनी जगह बनाने की कोश्शि करता तो हूं ना,
मानता हूं अतीत के किसी रस्ते में तुम अभी भी हो,
क्या करुँ आगे रास्ते में खड़ा मैं भी हूं ना !