उस सर्द हवा का एहसास अभी भी है,
उम्र चाहे छोटी थी पर एहसास अभी भी है,
कौन कहता है,
एहसास महसूस करने के लिए उम्र मै होना ज़रूरी है,
जो दिल मै दर्द बचपन से लिए बैठे है,
उनके लिए ये एहसास महज़ एक रोना है !!!
एक आम इंसान के एहसास समाज के लिए, इंसान के लिए, इंसान के दिल के लिए,प्यार के लिए, खुशियों के लिए, उदासी के लिए ! कैसे एक आम इंसान दिल मै कई सारी कहानियां लिए, एहसास लिए इस समाज मे भटक रहा है, ना कोई राह दिखाने वाला है और ना कोई साथ चलने वाला ! कैसे अकेला आगे बढ़ रहा है, जीवन के हर एहसास को समज रहा है ! एहसास ऐसा जो दिल को छू जाये, एहसास ऐसा जो दिल को रुला जाये !
Tuesday, October 27, 2020
Wednesday, October 21, 2020
" आज फिर रोया हूँ "
रोकना तो बहुत चाहा पर रोक ना पाया,
आंसू आँखों मे थे लेकिन दर्द दिल ने है पाया !
मेरी कहा चलति है इन आंसुओं पे बंदिश,
क्या सागर को कोई बन्ध है पाया,
दर्द तो सिर्फ दिल ने है पाया!
आंसू आँखों मे थे लेकिन दर्द दिल ने है पाया !
मेरी कहा चलति है इन आंसुओं पे बंदिश,
क्या सागर को कोई बन्ध है पाया,
दर्द तो सिर्फ दिल ने है पाया!
Sunday, August 23, 2020
"किस्मत और मेहनत का खेल"
मेरी किस्मत कहाँ खो गई मालूँम नही,
दिन बीतते जा रहे है, साल गुज़रते जा रहे है,
मै भी वहीं हु, मेरे बुरे दिन भी वहीं है!
आज आहट हुई है,
किसी के चलने की आवाज़ आई है,
लगता है किस्मत को मेरी लकीर दिखी है,
लकीर मै छुपी मायूसी दिखी है!
ये क्या हुआ मायूसी युहीं रह गई,
लकीरे युहीं मायूस रह गई,
किस्मत को मेरे घर का रास्ता मिल तो गया,
लगता है पता ढूंढ़ने मै किसी और घर रह गई!
अंत यही कहूँगा,
ये मेरे बचपन के ख्याल थे,
बिना मेहनत के कुछ मिलता नहीं,
मेहनत के बिना किस्मत को पता मिलता नहीं!
Friday, August 14, 2020
"आज सुन तो लो"
जो दिल मे है सुन तो लो,
समय से पहले सुन तो लो,
कही गुम ना जाये ये लफ्ज़ मेरे दिलो दिमाग मे,
आज जुबान पे है सुन तो लो !
लफ्ज़ कुछ ऐसे है जो छू जायेगे,
यकीन है दिल मे घर कर जायेगे,
घर का किराया तक न देंगे,
वही रहे राज करेगे !
एक ही गुज़ारिश है,
जो दिल मे है सुन तो लो,
समय से पहले सुन तो लो
आज जुबान पे है सुन तो लो!
समय से पहले सुन तो लो,
कही गुम ना जाये ये लफ्ज़ मेरे दिलो दिमाग मे,
आज जुबान पे है सुन तो लो !
लफ्ज़ कुछ ऐसे है जो छू जायेगे,
यकीन है दिल मे घर कर जायेगे,
घर का किराया तक न देंगे,
वही रहे राज करेगे !
एक ही गुज़ारिश है,
जो दिल मे है सुन तो लो,
समय से पहले सुन तो लो
आज जुबान पे है सुन तो लो!
Sunday, August 9, 2020
"दिल की बात"
दिल की बात बताना क्या ज़रूरी है,
दिल की दिल मै रखना क्या मजबूरी है,
ज़िक्र किया तो लोग हँसेगे,
ना बताया तो हम अन्दर ही अन्दर मरेगे !
आज दिल ने बोला है भर चूका हुँ मै,
आज मुझे खुलके रोने दे,
बाहर खडे इंसान को इस दर्द को देखने दे,
कैसा ये अकेलापन है इसे एहसास होने दे !
आँखों तक आंसू आये तो दिल ने फिर आवाज़ दी,
तू घर लौट वापिस आजा यही तेरी मंज़िल है,
क्या करेगा दुनिया देख कर लोग तुज पर हँसेगे,
यही हसी देखकर मुझसे और आंसू गिरेंगे !
दिल की दिल मै रखना क्या मजबूरी है,
ज़िक्र किया तो लोग हँसेगे,
ना बताया तो हम अन्दर ही अन्दर मरेगे !
आज दिल ने बोला है भर चूका हुँ मै,
आज मुझे खुलके रोने दे,
बाहर खडे इंसान को इस दर्द को देखने दे,
कैसा ये अकेलापन है इसे एहसास होने दे !
आँखों तक आंसू आये तो दिल ने फिर आवाज़ दी,
तू घर लौट वापिस आजा यही तेरी मंज़िल है,
क्या करेगा दुनिया देख कर लोग तुज पर हँसेगे,
यही हसी देखकर मुझसे और आंसू गिरेंगे !
Tuesday, July 28, 2020
" कल्पना, सत्ये, कोशिश मै उलझा जीवन "
कल्पना !
दिल है आसमान को छू लूं ,
आसमन मै रखे उन तारो को चूम लूं ,
उन मै बसी चमक को ज़िन्दगी मै भर लूं ,
चमक ऐसी जो ज़िन्दगी रोशन कर दे,
रात के सपनो मै उजाला भर दे !
सत्ये !
तारा है तो टूटेगा,
टूटने क साथ चमक बी ले डूबेगा,
ज़िन्दगी की रौशनी यूँही ढल जाये गी,
उन सपनो मै बसी खुशी कही गुम जाए गी,
रातो मै फिर अंधकार छा जाए गा !
कोशिश !
चाँद सी चमक जीवन मै भर दूंगा,
अंधकार मै बी बादलों मै चमकता दिखूगा,
चमक ऐसी जो कभी कम ना हो,
सपने ऐसे जो कभी अंधकार मै गुम ना हो,
अब फिर दिल है आसमान को छू लूं ,
आसमन मै रखे उस चाँद को चुम लूं !
Thursday, July 16, 2020
"ज़िन्दगी का अधूरा हिसाब"
आज पीछे मुड़ के देखा तो ज़िन्दगी का हिसाब मिल गया,
डरता था जिस हकीकत से,
उस हकीकत से फिर रूबरू हो गया !
हकीकत ऐसी जिससे बचपन से भागता था,
कोई आके फिर ना दबोच ले,
बस इसी डर मै रेहता था !
डर ऐसा जो रातो सोने ना देता था,
कब सुबह हो इसी आस मै रहता था,
बस इसी खौफ से लड़ना चाहता था !
आज खौफ दूर हुआ तो ज़िन्दगी आगे बढ़ गई,
ज़िन्दगी के साथ ये लड़ाई अधूरी रह गई,
काश उस वक़्त लड़ लिया होता,
ये हिसाब उसी वक़्त ख़तम कर दिया होता !
Tuesday, July 7, 2020
"आज दिल किया है घर वापिस लौट जाऊ"
आज दिल किया है घर वापिस लौट जाऊ,
बरसों से अकेली उस माँ के पास चला जाऊ,
छोड़ आया था जिस घर को अकेला,
उस घर को वापिस लौट जाऊ !
मांगी थी जिसस्ने दुआ मेरे काबिल बनने की,
आज वही दुआ बद्दुआ सी लगती है अकेलेपन मै,
मालूम है माँ तू हर रात रोती है,
उस वक़्त मेरी आँखे बी भर आती है !
खुश था जिस दिन घर से बहार पढ़ने निकला था,
अनजान था उस दर्द से जो ज़िन्दगी मै दस्तक देने वाला था,
आज उस दर्द मै जी रहा हु,
सब कुछ होते हुए बी अकेला महसूस कर रहा हु !
Saturday, May 30, 2020
"बचपन का एक रूपया"
अनजान था तो अच्छा था,
बेपरवाह हवा से लड़ता था,
क्या उम्र थी वो बिना किसी परवा के सोता था,
बस माँ के हाथ पर सर रख सपने संजोता था,
क्या मालूम था वो सपने कब क्या रूप लेंगे,
मुझे मेरी रूह से ही अलग कर देंगे !
वक्त बदलता गया, उम्र बढ़ती गई,
चंद रुपयों के लिए माँ से दूरी बढ़ती गई,
ये रुपय है साहब बस इनका ही मोल है,
जेब मै रखे है तो ही तुम्हारा तौल है !
मन करता है घर वापिस लौट जाऊ,
फिर माँ की गोद मै सर रख सो जाऊ,
कदम दो कदम चलते चलते नज़र फिर जेब पड़ी,
वही जेब मुझे फिर दफ्तर की ओर ले गई !
काश वो बचपन फिर लौट आये,
वो एक रुपये से मेरा जेब फिर भर जाये !
Friday, May 22, 2020
"सपनो मै उलझा जीवन"
है बहुत से सपने जीवन मे,
पर पूरे करू कैसे,
अभी हु बहुत कमज़ोर,
थामु कैसे सपनो की डोर !
एक एक कर उन सपनो को पूरा करना चाहता हूँ,
जीवन को उन सपनो के सूत्रों मे पिरोना चाहता हूँ !
उन सपनो को जीवन रथ पर कई ओर ले जाना चाहता हूँ,
लेंकिन डर है ये रथ जीवन मार्ग पर ना टूट जाये,
सपने पूरे करते करते जीवन की साँसे ना थम जाये !
साँसे थम गई तो क्या गम है,
लकिन सपने पूरे ना हुए तो गम ही गम है !
एक उम्मीद ( माँ ) है जीवन मै सपने पुरे करुगा अपने,
सपनो क साथ जीवन जीऊगा,
उम्मीद के साथ सपने पूरे करुँगा !
पर पूरे करू कैसे,
अभी हु बहुत कमज़ोर,
थामु कैसे सपनो की डोर !
एक एक कर उन सपनो को पूरा करना चाहता हूँ,
जीवन को उन सपनो के सूत्रों मे पिरोना चाहता हूँ !
उन सपनो को जीवन रथ पर कई ओर ले जाना चाहता हूँ,
लेंकिन डर है ये रथ जीवन मार्ग पर ना टूट जाये,
सपने पूरे करते करते जीवन की साँसे ना थम जाये !
साँसे थम गई तो क्या गम है,
लकिन सपने पूरे ना हुए तो गम ही गम है !
एक उम्मीद ( माँ ) है जीवन मै सपने पुरे करुगा अपने,
सपनो क साथ जीवन जीऊगा,
उम्मीद के साथ सपने पूरे करुँगा !
Thursday, May 14, 2020
"ये तो निश्यित है मर जाउगा"
मालूम है मर जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा,
साँसे रुक जाएगी मालूम है,
दड़कने थम जाये ये तो निश्यित है !
उस क्षण मै, थम जाएगी आंखे, थम जाएगी साँसे,
दुनिया चलती रहेगी बस थम जाउगा मै,
ये तो निश्यित है मर जाउगा मैं !
आया था रोते रोते,
देखते सबको मुस्कुराते - मुस्कुराते,
अब जब मर जाउगा,
होठो पर मुस्कान लेते जाउगा,
सबकी आँखों मै गम के आंसू छोड़ता चला जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा !
ये तो निश्यित है मर जाउगा,
साँसे रुक जाएगी मालूम है,
दड़कने थम जाये ये तो निश्यित है !
उस क्षण मै, थम जाएगी आंखे, थम जाएगी साँसे,
दुनिया चलती रहेगी बस थम जाउगा मै,
ये तो निश्यित है मर जाउगा मैं !
आया था रोते रोते,
देखते सबको मुस्कुराते - मुस्कुराते,
अब जब मर जाउगा,
होठो पर मुस्कान लेते जाउगा,
सबकी आँखों मै गम के आंसू छोड़ता चला जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा !
Saturday, April 18, 2020
"जीवन के तीन काले रतन"
दिल टुटा, सपने टूटे, दिल के हर अरमा छूटे,
अकेला रेह गया इस राह चलती दुनिया मै,
बस साथ ना छोड़ा मेरे अकेले पण ने!
जहा गया हमदरद बनता गया,
साये की तारा पीछे पीछे चलता गया,
साथ निभाता चलता गया इस जीवन डगर पे,
अकेले पण मै बी साथ ना छोड़ा इस अकेले पण ने!
जहा सूखा पाया वहा आंसुओं ने साथ दिया,
उस सूखे को बी आंसुओं ने नम कर दिया,
हर सूखे को इतना नम बनाया की उस मै बी ग़म पाया,
सब ने साथ छोड़ा पर इन आंसुओं ने मेरी आँखों का साथ ना छोड़ा!
अकेला पण, आंसू, गम ये मेरे जीवन के काले रतन कैसे इन्हे छोड़ू,
साथी है ये मेरे इन्हे कैसे पीछे छोड़ू!
अकेला रेह गया इस राह चलती दुनिया मै,
बस साथ ना छोड़ा मेरे अकेले पण ने!
जहा गया हमदरद बनता गया,
साये की तारा पीछे पीछे चलता गया,
साथ निभाता चलता गया इस जीवन डगर पे,
अकेले पण मै बी साथ ना छोड़ा इस अकेले पण ने!
जहा सूखा पाया वहा आंसुओं ने साथ दिया,
उस सूखे को बी आंसुओं ने नम कर दिया,
हर सूखे को इतना नम बनाया की उस मै बी ग़म पाया,
सब ने साथ छोड़ा पर इन आंसुओं ने मेरी आँखों का साथ ना छोड़ा!
अकेला पण, आंसू, गम ये मेरे जीवन के काले रतन कैसे इन्हे छोड़ू,
साथी है ये मेरे इन्हे कैसे पीछे छोड़ू!
Friday, April 17, 2020
Monday, April 6, 2020
"बईमान दिल "
अनजान था जो प्यार की राह पर चल पड़ा,
दिल बईमान था जो प्यार की डगर पर चल पड़ा!
कुछ अन-छुए जज़्बात थे,
कुछ अन-छुई मुलाकाते थी,
उन अन-छुई मुलाकातों में,
मेरी प्यार की अन-सुनी कहानी थी!
कदम दो कदम चलते चलते रास्ता तहे कर लिए,
उस रास्ते मे फैले फूलों को समेटना शुरू कर दिया,
बईमान थे वो फूल जो काँटे बन गए,
बईमान था वो दिल जिस्सके रस्ते बदल गए!
दिल बईमान था जो प्यार की डगर पर चल पड़ा!
कुछ अन-छुए जज़्बात थे,
कुछ अन-छुई मुलाकाते थी,
उन अन-छुई मुलाकातों में,
मेरी प्यार की अन-सुनी कहानी थी!
कदम दो कदम चलते चलते रास्ता तहे कर लिए,
उस रास्ते मे फैले फूलों को समेटना शुरू कर दिया,
बईमान थे वो फूल जो काँटे बन गए,
बईमान था वो दिल जिस्सके रस्ते बदल गए!
Saturday, April 4, 2020
"Kalyug Mai Aa Giri Ek Pari"
Dur Kisi Lok Se,
Ek Pari Iss Kalyug Mai Aa Giri Hai!
Dekh Iss Yug Ke Manushy Ko Naa Jane Kya Soonch Rehi Hai,
Maan Maan Mai Wo Iss Manushy Ke Liye Roo Rehi Hai,
Iss Manushy Ne Naa Jane Kitne Juth Bol Rakhe Hai,
Un Jutho Se Na Jane Kitno Ke Dil Thood Rakhe Hai,
Un Thoote Dilo Se Wo Apna Dil Joodh Raha Hai!
Dekh Iss Sansaar Mai Falli Juthi Parat Ko,
Dil Dil Mai Gabhrah Rehi Hai,
Iss Juthe Sansaar Mai Apne Kimti Ansu Bahaa Rehi Hai,
Kyunki Wo Iss Kalyug Mai Aa Giri Hai!
Har Chorahey Par Bethe Gareeb Par Naa Jane Kitni Baar Thuka Hai,
Bebass Stree Ko Naa Jane Kitne Zakham Diye Hai,
Iss Stree Ke Sansaar Ko Door Kisi Saroovar Mai Duba Diya Hai,
Iss Stree Ka Na Koi Astitva Na Koi Wajood,
Kyunki Ye Hai Kalyug!
Dekh Iss Sansaar Ko Maan Maan Mai Soonch Rehi Hai,
Kya Mai Iss Stree Jaisi Ban Jau Gi,
Saab Kuch Ase Hi Sehti Reh Jau Gi???
Ek Pari Iss Kalyug Mai Aa Giri Hai!
Dekh Iss Yug Ke Manushy Ko Naa Jane Kya Soonch Rehi Hai,
Maan Maan Mai Wo Iss Manushy Ke Liye Roo Rehi Hai,
Iss Manushy Ne Naa Jane Kitne Juth Bol Rakhe Hai,
Un Jutho Se Na Jane Kitno Ke Dil Thood Rakhe Hai,
Un Thoote Dilo Se Wo Apna Dil Joodh Raha Hai!
Dekh Iss Sansaar Mai Falli Juthi Parat Ko,
Dil Dil Mai Gabhrah Rehi Hai,
Iss Juthe Sansaar Mai Apne Kimti Ansu Bahaa Rehi Hai,
Kyunki Wo Iss Kalyug Mai Aa Giri Hai!
Har Chorahey Par Bethe Gareeb Par Naa Jane Kitni Baar Thuka Hai,
Bebass Stree Ko Naa Jane Kitne Zakham Diye Hai,
Iss Stree Ke Sansaar Ko Door Kisi Saroovar Mai Duba Diya Hai,
Iss Stree Ka Na Koi Astitva Na Koi Wajood,
Kyunki Ye Hai Kalyug!
Dekh Iss Sansaar Ko Maan Maan Mai Soonch Rehi Hai,
Kya Mai Iss Stree Jaisi Ban Jau Gi,
Saab Kuch Ase Hi Sehti Reh Jau Gi???
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