Saturday, May 30, 2020

"बचपन का एक रूपया"

छोटा था तो अच्छा था,
अनजान था तो अच्छा था,
बेपरवाह हवा से लड़ता था,
जब गिरता रोके फिर संबलता था !

क्या उम्र थी वो बिना किसी परवा के सोता था,
बस माँ के हाथ पर सर रख सपने संजोता था,
क्या मालूम था वो सपने कब क्या रूप लेंगे,
मुझे मेरी रूह से ही अलग कर देंगे !

वक्त बदलता गया, उम्र बढ़ती गई,
चंद रुपयों के लिए माँ से दूरी बढ़ती गई,
ये रुपय है साहब बस इनका ही मोल है,
जेब मै रखे है तो ही तुम्हारा तौल है !

मन करता है घर वापिस लौट जाऊ,
फिर माँ की गोद मै सर रख सो जाऊ,
कदम दो कदम चलते चलते नज़र फिर जेब पड़ी,
वही जेब मुझे फिर दफ्तर की ओर ले गई !

काश वो बचपन फिर लौट आये,
वो एक रुपये से मेरा जेब फिर भर जाये !

Friday, May 22, 2020

"सपनो मै उलझा जीवन"

है बहुत से सपने जीवन मे,
पर पूरे करू कैसे,
अभी हु बहुत कमज़ोर,
थामु कैसे सपनो की डोर !

एक एक कर उन सपनो को पूरा करना चाहता हूँ,
जीवन को उन सपनो के सूत्रों मे पिरोना चाहता हूँ !

उन सपनो को जीवन रथ पर कई ओर ले जाना चाहता हूँ,
लेंकिन डर है ये रथ जीवन मार्ग पर ना टूट जाये,
सपने पूरे करते करते जीवन की साँसे ना थम जाये !

साँसे थम गई तो क्या गम है,
लकिन सपने पूरे ना हुए तो गम ही गम है !

एक उम्मीद ( माँ ) है जीवन मै सपने पुरे करुगा अपने,
सपनो क साथ जीवन जीऊगा,
उम्मीद के साथ सपने पूरे करुँगा !


Thursday, May 14, 2020

"ये तो निश्यित है मर जाउगा"

मालूम है मर जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा,
साँसे रुक जाएगी मालूम है,
दड़कने थम जाये ये तो निश्यित है !

उस क्षण मै, थम जाएगी आंखे, थम जाएगी साँसे,
दुनिया चलती रहेगी बस थम जाउगा मै,
ये तो निश्यित है मर जाउगा मैं !

आया था रोते रोते,
देखते सबको मुस्कुराते - मुस्कुराते,
अब जब मर जाउगा,
होठो पर मुस्कान लेते जाउगा,
सबकी आँखों मै गम के आंसू छोड़ता चला जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा !

उस मुलाकात की गहराई

तुमसे मिलने का वो पल, अभी भी याद है, एहसास ऐसे थे उस पल में, उन एहसासों का एहसास अभी भी याद है। भरी भीड़ में मुझे ढूंढ़ना, फिर यूँ देखकर मु...