Saturday, April 18, 2020

"जीवन के तीन काले रतन"

दिल टुटा, सपने टूटे, दिल के हर अरमा छूटे,
अकेला रेह गया इस राह चलती दुनिया मै,
बस साथ ना छोड़ा मेरे अकेले पण ने!

जहा गया हमदरद बनता गया,
साये की तारा पीछे पीछे चलता गया,
साथ निभाता चलता गया इस जीवन डगर पे,
अकेले पण मै बी साथ ना छोड़ा इस अकेले पण ने!

जहा सूखा पाया वहा आंसुओं ने साथ दिया,
उस सूखे को बी आंसुओं ने नम कर दिया,
हर सूखे को इतना नम बनाया की उस मै बी ग़म पाया,
सब ने साथ छोड़ा पर इन आंसुओं ने मेरी आँखों का साथ ना छोड़ा!

अकेला पण, आंसू, गम ये मेरे जीवन के काले रतन कैसे इन्हे छोड़ू,
साथी है ये मेरे इन्हे कैसे पीछे छोड़ू!

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