आज पीछे मुड़ के देखा तो ज़िन्दगी का हिसाब मिल गया,
डरता था जिस हकीकत से,
उस हकीकत से फिर रूबरू हो गया !
हकीकत ऐसी जिससे बचपन से भागता था,
कोई आके फिर ना दबोच ले,
बस इसी डर मै रेहता था !
डर ऐसा जो रातो सोने ना देता था,
कब सुबह हो इसी आस मै रहता था,
बस इसी खौफ से लड़ना चाहता था !
आज खौफ दूर हुआ तो ज़िन्दगी आगे बढ़ गई,
ज़िन्दगी के साथ ये लड़ाई अधूरी रह गई,
काश उस वक़्त लड़ लिया होता,
ये हिसाब उसी वक़्त ख़तम कर दिया होता !

❤️❤️❤️❤️❤️
ReplyDeleteThnx
DeleteAwesome!!
ReplyDeletethnx brother
DeleteNice lines..
ReplyDeletethnx
DeleteNothing to say... Well described... Zindegi ka adhura hisab ka chakar me aaj insan aapnapan ko kho dia hey.
ReplyDeletethnx
ReplyDelete