Sunday, August 9, 2020

"दिल की बात"

दिल की बात बताना क्या ज़रूरी है,
दिल की दिल मै रखना क्या मजबूरी है,
ज़िक्र किया तो लोग हँसेगे,
ना बताया तो हम अन्दर ही अन्दर मरेगे !


आज दिल ने बोला है भर चूका हुँ मै,
आज मुझे खुलके रोने दे,
बाहर खडे इंसान को इस दर्द को देखने दे,
कैसा ये अकेलापन है इसे एहसास होने दे !


आँखों तक आंसू आये तो दिल ने फिर आवाज़ दी,
तू घर लौट वापिस आजा यही तेरी मंज़िल है,
क्या करेगा दुनिया देख कर लोग तुज पर हँसेगे,
यही हसी देखकर मुझसे और आंसू गिरेंगे !

Tuesday, July 28, 2020

" कल्पना, सत्ये, कोशिश मै उलझा जीवन "


कल्पना !

दिल है आसमान को छू लूं , 
आसमन मै रखे उन तारो को चूम लूं ,
उन मै  बसी चमक को ज़िन्दगी मै भर लूं ,
चमक ऐसी जो ज़िन्दगी रोशन कर दे,
रात के सपनो मै उजाला भर दे !

सत्ये !

तारा है तो टूटेगा,
टूटने क साथ चमक बी ले डूबेगा,
ज़िन्दगी की रौशनी यूँही ढल जाये गी,
उन सपनो मै बसी खुशी कही गुम जाए गी,
रातो मै फिर अंधकार छा जाए गा !

कोशिश !

चाँद सी चमक जीवन मै भर दूंगा,
अंधकार मै बी बादलों मै चमकता दिखूगा,
चमक ऐसी जो कभी कम ना हो,
सपने ऐसे जो कभी अंधकार मै गुम ना हो,
अब फिर दिल है आसमान को छू लूं ,

आसमन मै रखे उस चाँद को चुम लूं !

Thursday, July 16, 2020

"ज़िन्दगी का अधूरा हिसाब"

आज पीछे मुड़ के देखा तो ज़िन्दगी का हिसाब मिल गया,
कुछ बिखरे सवालो का जवाब मिल गया,
डरता था जिस हकीकत से,
उस हकीकत से फिर रूबरू हो गया !

हकीकत ऐसी जिससे बचपन से भागता था,
कोई आके फिर ना दबोच ले,
बस इसी डर मै रेहता था !

डर ऐसा जो रातो सोने ना देता था,
कब सुबह हो इसी आस मै रहता था,
बस इसी खौफ से लड़ना चाहता था !

आज खौफ दूर हुआ तो ज़िन्दगी आगे बढ़ गई,
ज़िन्दगी के साथ ये लड़ाई अधूरी  रह गई,
काश उस वक़्त लड़ लिया होता,
ये हिसाब उसी वक़्त ख़तम कर दिया होता !

Tuesday, July 7, 2020

"आज दिल किया है घर वापिस लौट जाऊ"

आज दिल किया है घर वापिस लौट जाऊ,
बरसों से अकेली उस माँ के पास चला जाऊ,
छोड़ आया था जिस घर को अकेला,
उस घर को वापिस लौट जाऊ !

मांगी थी जिसस्ने दुआ मेरे काबिल बनने की,
आज वही दुआ बद्दुआ सी लगती है अकेलेपन मै,
मालूम है माँ तू हर रात रोती है,
उस वक़्त मेरी आँखे बी भर आती है !

खुश था जिस दिन घर से बहार पढ़ने  निकला था,
अनजान था उस दर्द से जो ज़िन्दगी मै दस्तक देने वाला था,
आज उस दर्द मै जी रहा हु,
सब कुछ होते हुए बी अकेला महसूस कर रहा हु !

Saturday, May 30, 2020

"बचपन का एक रूपया"

छोटा था तो अच्छा था,
अनजान था तो अच्छा था,
बेपरवाह हवा से लड़ता था,
जब गिरता रोके फिर संबलता था !

क्या उम्र थी वो बिना किसी परवा के सोता था,
बस माँ के हाथ पर सर रख सपने संजोता था,
क्या मालूम था वो सपने कब क्या रूप लेंगे,
मुझे मेरी रूह से ही अलग कर देंगे !

वक्त बदलता गया, उम्र बढ़ती गई,
चंद रुपयों के लिए माँ से दूरी बढ़ती गई,
ये रुपय है साहब बस इनका ही मोल है,
जेब मै रखे है तो ही तुम्हारा तौल है !

मन करता है घर वापिस लौट जाऊ,
फिर माँ की गोद मै सर रख सो जाऊ,
कदम दो कदम चलते चलते नज़र फिर जेब पड़ी,
वही जेब मुझे फिर दफ्तर की ओर ले गई !

काश वो बचपन फिर लौट आये,
वो एक रुपये से मेरा जेब फिर भर जाये !

Friday, May 22, 2020

"सपनो मै उलझा जीवन"

है बहुत से सपने जीवन मे,
पर पूरे करू कैसे,
अभी हु बहुत कमज़ोर,
थामु कैसे सपनो की डोर !

एक एक कर उन सपनो को पूरा करना चाहता हूँ,
जीवन को उन सपनो के सूत्रों मे पिरोना चाहता हूँ !

उन सपनो को जीवन रथ पर कई ओर ले जाना चाहता हूँ,
लेंकिन डर है ये रथ जीवन मार्ग पर ना टूट जाये,
सपने पूरे करते करते जीवन की साँसे ना थम जाये !

साँसे थम गई तो क्या गम है,
लकिन सपने पूरे ना हुए तो गम ही गम है !

एक उम्मीद ( माँ ) है जीवन मै सपने पुरे करुगा अपने,
सपनो क साथ जीवन जीऊगा,
उम्मीद के साथ सपने पूरे करुँगा !


Thursday, May 14, 2020

"ये तो निश्यित है मर जाउगा"

मालूम है मर जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा,
साँसे रुक जाएगी मालूम है,
दड़कने थम जाये ये तो निश्यित है !

उस क्षण मै, थम जाएगी आंखे, थम जाएगी साँसे,
दुनिया चलती रहेगी बस थम जाउगा मै,
ये तो निश्यित है मर जाउगा मैं !

आया था रोते रोते,
देखते सबको मुस्कुराते - मुस्कुराते,
अब जब मर जाउगा,
होठो पर मुस्कान लेते जाउगा,
सबकी आँखों मै गम के आंसू छोड़ता चला जाउगा,
ये तो निश्यित है मर जाउगा !

उस मुलाकात की गहराई

तुमसे मिलने का वो पल, अभी भी याद है, एहसास ऐसे थे उस पल में, उन एहसासों का एहसास अभी भी याद है। भरी भीड़ में मुझे ढूंढ़ना, फिर यूँ देखकर मु...